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मैं एक माँगता हूँ वह देता हज़ार है

खालिक़ मेरा ग़युर है परवरदिगार है
सब कायेनात ईस की अबादत गूज़ार है
मूझ को मेरे ख़ुदा पे बड़ा फख़रो नाज़ है
मैं एक माँगता हूँ वह देता हज़ार है

- ज़ीशान आज़मी