मोमिन कौन है ?
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मौला अली के अलग अलग फरमानो के मुताबिक़ मोमिन की पहचान
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मोमिन खुशी में मुस्कराता है ठहाके नहीं लगाता
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मोमिन जाहिल नही साहिबे इल्म होता है
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मोमिन बेपनाह बर्दाश्त वाला होता है और मेहरबान होता है
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मोमिन हमेशा हक़ के साथ होता है अपने इल्म के खिलाफ काम नही करता
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मोमिन गुस्से में भी इंसाफ़ से गुरेज़ नही करता
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मोमिन किसी के राज़ को फ़ाश नही करता
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मोमिन अपनी तारीफ़ नही चाहता और न तारीफ़ पर खुश होता है उसका हर अमल रब को राज़ी करने के लिए होता है आखिरत के लिए डरता है
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मोमिन बेहतरीन दोस्त और वादा निभाने वाला होता है
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मोमिन दूसरों की भलाई के लिए फिक्रमंद होता है
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मोमिन न कंजूस होता है न फिजूल खर्च
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मोमिन न लालची होता है न बेचैन सब्र करने वाला होता है
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मोमिन मे इल्म का ठहराव होता है अधूरा इल्म ले कर बहस नही करता
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बिना पूरी बात जाने या तस्दीक के मोमिन राय नही कायम करता
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मोमिन बदले नही लेता बल्कि माफ करने वाला होता है
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अपनी भलाइयों पर गुरूर नही करता न उनका बयान करता है बल्कि दूसरों को लिए दिल में नेक खयाल रखता है
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मोमिन खुदा से डरता है दूसरों की कमियां नही तलाश करता
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मोमिन एहसान मानने वाला होता है चाहे रत्ती भर भी हो
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जो एहसान भूल जाए उसका बदला न दे वो मोमिन नही
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मौला फरमाते हैं इंसान की मिसाल उस मक्खी की तरह है जो सारा जिस्म छोड़ कर ज़ख्म पर ही बैठती है
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मोमिन वो है जो दूसरों मे अच्छाइयां तलाश करे एहसान और नेकी को याद करे न की हमेशा बुराइयां और कमियां बयान कर बदगुमान रहे और दूसरों को भी बदगुमान करे
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अब हम सब अपने अंदर झांके और जाने कि हम मोमिन हैं या नहीं
अल्लाह सबको नेक अमल की तौफीक अता करे आमीन
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