Pages

Who is shia?

"शीया"

वो जो पाबंदे शरीयत है वही शीया है,
जिसको कुरआन से निस्बत है वही शीया है...

मकसदे शेह पे अमल करते हुए जीता है,
जो अज़ादारी की जीनत है वही शीया है...

वक्त पर जिसने अदा की हों नमाज़ें सारी,
उसका हज बाईसे अज़मत है वही शीया है...

रिश्तेदारों से सदा करता है जो हुस्ने सुलूक,
जिसको अपनो से मोहब्बत है वही शीया है...

जिसकी बेहनें कभी बेपर्दा नहीं आती नज़र,
खुद जो परदे की ज़मानत है वही शीया है...

हक में मोमिन के किया करता है हर रोज़ दुआ,
जिसके लफ्जों में हकीकत है वही शीया है...

अपने माँ बाप की खिदमत में लगा रहता है,
और बच्चों से भी उल्फ़त है वही शीया है...

भूक का रखता है हमसाये की हर वक्त ख़याल,
जिसका शेवा ही सखावत है वही शीया है...

बनके रहता है कबीले में शराफ़त की मिसाल,
और गैरों में भी इज्ज़त है वही शीया है...

झूट से राब्ता रखता ही नहीं है अपना,
जिसको हक कहने की आदत है वही शीया है...

दूर है बुग्जो हसद और रियाकारी से,
जिसका ईमान सलामत है वही शीया है...

अपने अख़लाक़ से गैरों को बनाले अपना,
जिसके किरदार में ताकत है वही शीया है...

हाथ फैलाता नहीं गैर के दरवाज़े पर,
वो जो खुद्दार तबीयत है वही शीया है...

जिसका हर फ़ेल है खुशनूदिये खालिक के लिये,
जिसकी हर साँस इबादत है वही शीया है...

जो समझ लेता है हर बात के दोनो पहलू,
जिसमें ये आला ज़हानत है वही शीया है...

इसको तुम तंज़ कहो या के नसीहत "सलमान",
बात जो कहता हकीकत है वही शीया है...