एक बच्चा जला देने वाली गर्मी में नंगे पैर
गुलदस्ते बेच रहा था
लोग उसमे भी मोलभाव कर रहे थे।
एक आदमी को उसके पैर देखकर बहुत दुःख हुआ, उस आदमी
ने बाज़ार से नया जूता ख़रीदा और उसे देते हुए कहा
"बेटा
लो, ये जूता पहन लो"
.
लड़के ने फ़ौरन जूते निकाले और पहन लिए
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उसका चेहरा ख़ुशी से दमक उठा था.
वो उस आदमी की तरफ़ पल्टा
और हाथ थाम कर पूछा, "आप अल्लाह हैं?
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"उसने घबरा कर हाथ छुड़ाया और कानों को हाथ लगा कर
कहा, "नहीं बेटा, नहीं, मैं अल्लाह
नहीं"
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लड़का फिर मुस्कराया और कहा,
"तो फिर ज़रूर अल्लाह के दोस्त होंगे,
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क्योंकि मैंने कल रात अल्लाह से कहा था
कि मुझे नऐ जूते देदें".
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वो आदमी मुस्कुरा दिया और उसके सर को प्यार से
चूमकर अपने घर की तरफ़ चल पड़ा.
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अब वो आदमी भी जान चुका था कि अल्लाह का दोस्त
होना
कोई मुश्किल काम नहीं..
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खुशियाँ बाटने से मिलती है "सूरेह यासीन" -- फज्र के बाद पढ़ने से हर ख्वाहिश पूरी होती हे
"सूरेह वाकिया" -- मगरिब के बाद पढ़ने से कभी फाका नहीं आता
"सूरेह कौशर " -- दुश्मनो की दुश्मनी से बचाती हे
"सूरेह काफिरुंन" -- मौत के वक़्त कुफ़्र से बचाती हे
"सूरेह इखलाश" -- मुनाफ़िक़ात से बचाती है
"सूरेह फलक" -- हादसों से बचाती हे
"सूरेह नास" -- बसबसो से बचाती हे
ये तोहफा दुसरो को भी दे क्योंकि अल्लाह अज्जओ जल तोहफा देने वालो को पसंद फरमाता हे..
छोटी सी दुवा "ए-अल्लाह" जब तू अपनी रहमतो के दरवाजे खोले और पुकारे... "है कोई रहमत मांगने वाला.? है कोई खुशिया मांगने वाला.? है कोई शिफा मांगने वाला.? है कोई मेरे "महबूब" (सल्ललाहो अलैही वसल्लम)" की चाहत मांगने वाला?